The Indian Penal Code, 1860
अध्याय I से X
अध्याय V: दुष्प्रेरण के विषय में
धारा 116: कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण - यदि अपराध न किया जाए। यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति एक सार्वजनिक सेवक हो जिसका कर्तव्य अपराध को रोकना है
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Explanation using examples
उदाहरण 1:
रवि, एक व्यापारी, सुरेश, एक सरकारी कर अधिकारी, को उसकी कर देयता को कम करने के लिए रिश्वत देता है। सुरेश, एक ईमानदार अधिकारी होने के नाते, रिश्वत स्वीकार करने से मना कर देता है। भले ही रिश्वत स्वीकार नहीं