Section 252 of BNSS : धारा 252: दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023
Summary
यदि कोई अभियुक्त अपराध स्वीकार करता है, तो न्यायाधीश उसकी स्वीकारोक्ति दर्ज करेगा और अपने विवेक से उसे दोषी ठहरा सकता है।
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Explanation using Example
उदाहरण 1:
रवि पर चोरी का आरोप है और उसे सत्र न्यायालय के समक्ष लाया जाता है। परीक्षण के दौरान, रवि आरोपों को स्वीकार करने का निर्णय लेता है। न्यायाधीश रवि की दोष स्वीकारोक्ति दर्ज करता है। परिस्थितियों और साक्ष्यों को देखते हुए, न्यायाधीश अपने विवेक का उपयोग करके रवि को उसकी दोष स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषी ठहराता है। इसके बाद रवि को चोरी के लिए कानून के अनुसार सजा दी जाती है।
उदाहरण 2:
मीना पर धोखाधड़ी का आरोप है और वह सत्र न्यायालय में परीक्षण का सामना कर रही है। कार्यवाही के दौरान, मीना अपनी दोष स्वीकार करती है और धोखाधड़ी के आरोपों को स्वीकार करती है। न्यायाधीश मीना की दोष स्वीकारोक्ति को आधिकारिक रूप से दर्ज करता है। मामले के विवरण पर विचार करने के बाद, न्यायाधीश मीना को उसकी दोष स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषी ठहराने का निर्णय लेता है। इसके बाद मीना को धोखाधड़ी के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार दंडित किया जाता है।